BSE एंटरेंस टेस्ट एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थी ध्यान दें, मानसिक दबाव में नहीं मानसिक तंदुरूस्ति के साथ करें तैयारी

संतोष पोहरी@शिवपुरी। सीबीएसई, विभिन्न प्रवेश परीक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं का दौर शुरू होने वाला है ऐसे में परीक्षार्धियों के लिए यह समय थोडा कठिन गुजरता है, विद्यार्थियों को अपनी परीक्षाओं के दौरान नियमित दिनचर्या, हल्के व्यायाम, योगा—प्राणयाम के साथ हल्का सुपाच्य भोजन एवं भरपूर पानी लेते रहना चाहिए जो कि मानसिक दबाब को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। परीक्षाओं के समय बच्चों के मानसिक दबाब को कम करने विषय में रिहेबिलेटेशन सायकोलॉजिस्ट एण्ड चाईल्ड काउंसलर पुनीत दीक्षित ने चर्चा के दौरान विस्तारित रूप से बताया, विद्यार्थियों को तनाव रहित परीक्षा देने के लिए, माता पिता एवं परिजनों की भूमिका आदि विषयों पर अमूल्य सुझाव प्रदान किये हैं।

परीक्षा के समय बच्चों के साथ ही अभिभावकों पर भी मानसिक रूप से दबाव रहता है, अक्सर देखा गया है कि हम अनचाहे तौर पर ही सही अत्यधिक दबाव को महसूस करते हैं, ऐसे में छोटे—छोटे प्रयास करने मात्र से ही इस दबाब से छुटकारा पा सकते हैं और न केवल छुटकारा बल्कि दबाव के उलट तंदुरुस्त मानसिक विचारों के साथ स्वस्थ मन से परीक्षाओं का आनंद ले सकते हैं।

नियमित दिनचर्या से कम होता है मानसिक दबाब

विद्यार्थियों को सर्वप्रथम अपनी नियमित दिनचर्या बनाकर उसका पालन करना चाहिए, अनियमित, अस्त व्यस्त दिनचर्या विद्यार्थियों के मानसिक दबाव का एक कारण हो सकती है। परीक्षार्थियों को कम से कम 06 घण्टे की नींद लेना आवश्यक होता है, हल्का सुपाच्य भोजन एवं नियमित अंतराल पर पानी पीते रहना चाहिए जिससे मस्तिष्क को उचित तरीके से कार्य करने हेतु ऊर्जा मिल सके।

परीक्षा समय सारणी अनुसार स्वयं का स्टडी प्लान तैयार करें

परीक्षाओं के दबाब को कम करने लिए विद्यार्थियों को अपना व्यक्तिगत स्टडी प्लान तैयार करना चाहिए जो कि परीक्षा समय सारणी अनुसार हो, निर्धारित विषय के पेपर के लिए उसी विषय के नोटस के साथ तैयारी की जानी चाहिए। दो पेपर के बीच मिलने वाले समय का सदुपयोग करते हुए अपने स्वयंं के द्वारा तैयार नोट्स का रिवीजन करना चाहिए, शॉर्टकट अथवा चयनित टापिक्स पर आत्यधिक समय नहीं देना चाहिए।

परीक्षा के समय सोशल मीडिया से दूरी है जरूरी

वर्तमान में सोशल मीडिया का प्रचलन तेजी से बढा है जिससे प्रत्येक नागरिक एवं विद्यार्थी प्रभावित हैं। परीक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बना लेना ही बेहतर होगा क्योंकि नकारात्मक पोस्ट आपके मस्तिष्क पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से असर कर सकती है, आप कितना ही उनसे बचने का प्रयास करें परंतु नकारात्मक विचार आपकी वर्ष भर की मेहनत एवं पढाई को प्रभावित कर सकते हैं। सोशल मीडिया का ज्यादा उपयोग अथवा उस पर ज्यादा समय व्यतीत करने से तनाव, अवसाद, चिंता, क्रोध, अपराध बोध एवं नकारात्मकता का स्तर बढ़ता है जिससे पढाई एवं तैयारी पर भी असर पडता है। सोशल मीडिया की अपेक्षा आप अपने परिजनों, भाई बहन, मित्रों के साथ मनोरंजन हेतु हंसी मजाक, संगीत, खेल आदि का आनंद लेंगे तो बेहतर होगा।

30 मिनट की वॉक एवं योग से बॉडी होगी रिचार्ज

विद्यार्थियों को अपनी व्यस्त दिनचर्या में से कुछ समय सुबह की सैर के लिए निकालना चाहिए, आयुर्वेद ग्रंथों में भी ब्रह्म मुहूर्त की सैर करने का विशेष महत्व बताया गया है, वैज्ञानिक शोध के निष्कर्ष भी प्रात:काल की सैर को शरीर में स्फूर्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य हेतु लाभप्रद मानते हैं। प्रात:काल कम से कम 15 से 30 मिनट का समय निकालकर ताजा हवा में तेज गति से पैदल चलने से शरीर में रक्त संचार के साथ ऑक्सीजन के लेवल में भी इजाफा होता है। इसके साथ ही योग, प्राणायाम का प्रयोग भी मानसिक दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अनुलोम—विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, उद्गीत के साथ ही शवासन का प्रयोग पॉंच बार करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है एकाग्रता में भी वृद्धी होगी।

ईश्वर में आस्था आपको मानसिक रूप से शक्ति प्रदान करती है

प्रतिदिन अपनी दिनचर्या अनुसार ईश्वर की भक्ति, पूजा पाठ करने से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है जो आपको सकारात्मक रखने में मदद करती है। ईश्वर के प्रति आस्था रखने वाले व्यक्ति वैचारिक एवं मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अधिक मजबूत होते हैं।

परीक्षा कक्ष में अपने सबसे करीबी व्यक्ति के बारे में सोचें

परीक्षा देने के समय कक्ष में बैठकर कुछ समय अवश्य मिलता जब आपको उत्तर पुस्तिका एवं प्रश्नपत्रों का वितरण किया जा रहा होता है, इस खाली समय के दौरान आप अपने सबसे करीबी उस व्यक्ति के बारे में सोचें जिससे मिलकर अथवा बातचीत करने भर से आपको राहत का अनुभव होता है, उसके साथ बिताए आनंद के पलों को याद करें, ऐसा करने से आपके मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा, मानसिक तौर पर स्वयं में एक हल्कापन अनुभव होगा जो आपको बिना किसी तनाव के प्रश्न पत्र हल करने में सहायक सिद्ध होगा।

माता पिता एवं परिजनों की परीक्षा के दौरान भूमिका

विद्यार्थियों के द्वारा किये जा रहे कार्यों, उसकी मेहनत एवं छोटी छोटी आदतों जो कि प्रशंसा के लायक हो उन पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें उनकी तारीफ करें। परीक्षा की तैयारी करते समय उसे स्वयं के अनुसार पढाई करने दें, परीक्षा के समय अधिकांश छात्र खुद गंभीर होकर तैयारी करते हैं, उन्हें आवश्यक निर्देश देने से बचें। बच्चों से संपर्क बनाए रखें उनकी खुशी एवं आवश्यकताओं का ध्यान रखें, उनके सामने घर की समस्याओं तथा पारिवारिक परेशानियों का जिक्र न करें और सर्वाधिक महत्वपूर्ण हर पेपर के बाद पेपर कैसा गया, कितने नंबर आएंगे, कितने प्रश्न हल किए जैसे सवालों का प्रहार न करें एवं न ही अपने बच्चे की तुलना अन्य बच्चों से करें क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अथवा विद्यार्थी की अपनी एक क्षमता होती है, अपनी पसंद होती, कार्य करने का तरीका होता है, मस्तिष्क की सीमा होती है।