युवाओं ने गोद लिया यह पार्क: नशेड़ियों का अड्डा था यह पार्क, फूल नहीं गांजे की आती थी महक - Shivpuri News

शिवपुरी। शहर में नगर पालिका क्षेत्र में 40 से अधिक पार्क हैं, लेकिन उनमें से 4-5 पार्कों को छोड़ दिया जाए तो सभी बदहाली का शिकार हैं। जो पार्क सुबह की सैर और शाम को बच्चों को खेलने के लिए होने चाहिए वह नशेडियों का अड्डा बने हुए हैं। नगर पालिका ने भी शहर के दो-तीन पार्कों को चमकाकर शेष को लावारिस छोड़ दिया है।

लावारिस छोड़े जाने से राघवेंद्र नगर का पार्क भी ऐसी ही बदहाली का शिकार हो गया। रहवासियों ने जगह-जगह इसमें सुधार करने की गुहार लगाई जिससे शाम के समय बच्चे यहां पर खेल सकें। बुजुर्ग सुबह और शाम टहल सकें, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनकी गुहार नहीं सुनी। देखरेख के अभाव में यह बदहाल हो गया और शराबियों व असामाजिक तत्वों ने यहां अपना डेरा जमा लिया। इसके बाद कॉलोनी वासियों ने खुद ही पार्क का जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया और अब यहां पर काम करा रहे हैं।

इस पार्क की बदहाली से नगरीय क्षेत्र में चल रहे स्वच्छता अभियान की बदहाली को भी समझा जा सकता है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के निर्देश पर उनके समर्थकों और नगर पालिका के अधिकारियों ने जगह-जगह सफाई कराई थी। इस पार्क पर भी नगर पालिका ने सफाई कराई। एक दिन में ही दो ट्रक भरकर कर्मचारियों ने कचरा निकाला। नगर पालिका सीएमओ और भाजपा के मंत्री समर्थक आए और फोटो खिंचवाकर चले गए।

इसके बाद कई दिन तक इस स्वच्छता अभियान के कसीदे गढ़े गए। लेकिन हकीकत में हुआ यह कि यह सारी कोशिशें सिर्फ चंद घंटे के लिए ही थीं। इसके बाद पार्क फिर उसी हाल में छोड़ दिया गया। एक दिन में चंद घंटे सफाई कर मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर खुद के नंबर तो बढ़ाए जा सकते हैं, लेकिन इससे शहर को स्वच्छ बनाना संभव नजर नहीं आता है।

युवाओं ने इकठ्ठी की राशि
पार्क की स्थिति सुधारने के लिए कॉलोनी के युवा आगे आए और उन्होंने ही इसके लिए राशि एकत्रित की। रहवासी जेपी जैन ने बताया कि पार्क में नशेडियों का जमावड़ा रहता था। यहां पर आए दिन शराब की बोतलें और इंजेक्शन पड़े रहते थे। इसलिए इसकी बाउंड्री वॉल कराई है और फिर इसे फेंसिंग से कवर किया है। इससे कोई अनाधिकृत रूप से पार्क में प्रवेश नहीं कर पाएगा। इसके अतिरिक्त साफसफाई का काम भी पूरा करा दिया गया है। अब यहां पर जल्द ही पौधारोपण शुरू किया जाएगा जिससे यहां बच्चों के खेलने की जगह भी बन सके।

शहर में 40 पार्क पर 100 माली, फिर भी बदहाली

शहर में नगर पालिका के अधीन करीब 40 पार्क हैं जिनमें काम करने के लिए 100 माली हैं। इतने मालियों की फौज होने के बाद भी शहर के अधिकांश पार्क बदहाली का ही शिकार नजर आते हैं। चंद पार्क नगर पालिका ने देखने-दिखाने और ऊपर से आए दबाव में दुरुस्त करा दिए, लेकिन बाकी जगह पार्क कचराघर बन रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि पार्क से ज्यादा माली होने के बाद यह स्थिति है।

कागजी साबित हुए अधिकारियों के दावे

गत वर्ष अक्टूबर में नगर पालिका सीमएओ शैलेश अवस्थी और एडीएम उमेश शुक्ला ने नप कार्यालय में मालियों की बैठक ली थी। इस दौरान पता चला था कि अधिकांश माली अपना मूल काम नहीं कर रहे हैं। इसके बाद इनसे ट्रंचिंग ग्राउंड पर पौधारोपण कराया गया और शहर के पार्कों को संवारने के बड़े-बड़े दावे किए। इसे पांच महीने बीत गए, लेकिन शहर के आधे पार्क भी नहीं संवर पाए। न ही हरियाली का दिशा में कोई बड़ा कदम उठाया जा सका।