सिर्फ कलैंडर बदल रहा हैं नही बदली शहर की तस्वीर: सीवर भी अटका, शहर की बुझाना था प्यास, कनेक्शन मिले चंद हजार- Shivpuri News

शिवपुरी। 2021 साल अब गुजरने की ओर हैं,लेकिन शहर के हालात नही बदले हैं,शहर के हालात वही की वही हैं। केवल साल की फ्रेम 2022 बदली जाऐगी,लेकिन तस्वीर वही होगी वही अधूरा सीवर प्रोजेक्ट और अपने आप से जंग लडती सिंध जलावर्धन योजना,क्यो शहर की बुझानी थी प्यास,कनेक्शन मिले चंद हजार.........

सीवर प्रोजेक्ट:पूर्णता की ओर नही कंपनी ब्लैकलिस्टेड करने की ओर

शिवपुरी में सीवर प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ था, ताकि शहर के नालों में खोले गए सीवर के पाइपों को बंद करवाया जाकर तालाब और झीलों में जा रही सीवर की गंदगी को रोका जाए। इस पायलेट प्रोजेक्ट का मुख्य उ़देश्य झीलों को सीवर की गंदगी से मुक्त करके उसे साफ-सुथरा रखने के साथ ही उसके आसपास आकर्षक लाइटिंग आदि लगाकर सैलानियों के लिए तैयार करना था। झीलों को संरक्षित करने की दिशा में अभी तक कोई पहल नहीं की गई,बल्कि शहर का बर्बाद करने वाला यह प्रोजेक्ट अधिकारियों के लिए भ्रष्टाचार की थाली बन गई।

21 माह का प्रोजेक्ट साढ़े 8 साल बाद भी अधूरा

सीवर प्रोजेक्ट का वर्क आर्डर जुलाई 2013 को जैन एंड रॉय केा मिला थां यह प्रोजेक्ट 21 माह में पूरा होना था, लेकिन साढ़े 8 साल बाद भी अधूरा है। प्रोजेक्ट स्वीकृति के समय इसकी लागत 62 करोड़ रुपए थी, लेकिन इतने समय में 110 करोड़ रुपए तक लागत पहुंच गई। जबकि प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हुआ। कुल मिलाकर प्रोजेक्ट के कलैंडर में 9वीं साल जुडने वाली हैं,लेकिन प्रोजेक्ट पूरा नही हुआ है अब इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाली कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की तैयारी चल रही हैं। क्यो की प्रोजेक्ट की टैंस्टिंग कराने को अभी कंपनी तैयार नही हैं डर रही हैं

सिंध जलावर्धन योजना:कंपनी को ब्लैकलिस्टेड किया,लेकिन काम वही कर रहे हैं

सिंध जलावर्धन परियोजना दोशियान कंपनी को सौंपी गई थी। दोशियान कंपनी का काम और उस दौरान हुआ भ्रष्टाचार लगातार सुर्खियों में रहा। दोशियान ने शुरुआत दौर में ही एक साथ जीआरसी पाइपों की खेप खपा दी, जो कंपनी ने स्वयं बनाए थे। इन पाइपों का तत्कालीन नपाध्यक्ष और सीएमओ ने भुगतान भी कर दिया।

दोशियान के कामों की जांच के लिए गठित समिति के सदस्य एवं जल संसाधन विभाग के रिटायर कार्यपालन यंत्री आरएनसिंह ने बिछाए गए पाइपों का प्रैशर जांचने (हाइड्रो टेस्टिंग) के बारे में खुलासा किया कि लाइप बिछाने के बाद प्रैशर की रिपोर्ट ही शामिल नहीं की गई।

दोशियान ने जीआरपी पाइप डाले थे, वे गुणवत्तीविहीन थे। इसके बाद दोशियान को ब्लैक लिस्टेड कर ओम कंस्ट्रक्शन को काम दिया गया। इस कंपनी ने जीआरसी की जगह एमएस पाइप डाले। मजे की बात यह है कि सिंध में भ्रष्टाचार के लिए जो दोशियान जिम्मेदार थी उसी के मैनेजर महेश मिश्रा की कंपनी ओम कंस्ट्रक्शन को दोबारा काम दिया गया।

बुझाना थी शहर की प्यास, कनेक्शन मिले चंद हजार

जिस सिंध परियोजना को शहर की दो लाख आबादी की प्यास बुझाना थी उसमें करोड़ों खर्च करने के बाद चंद हजार कनेक्शन ही दिए जा सके हैं। आज भी शहर बड़ी आबादी पानी के लिए बोरिंग पर निर्भर है।

पहले इस योजना का ठेका दोशियान के पास था। इसकी कार्यप्रणाली काफी विवादित रही और इनके द्वारा डाली गई लाइन को भी दोबार से खोदा जा रहा है। इस योजना के नाम पर ठगे गए शहरवासी अब इसके कनेक्शन लेने के लिए ही ओ नहीं आ रहे हैं। अब नगर पालिका को इसके कनेक्शन देने के लिए जगह-जगह कैंप लगाने पड़ रहे हैं।