अब शमशान में शांति:ना क्रियाकर्म,ना पिंड दान,तालों में लॉक अस्थियां, मातम पर भी कोरोना कर्फ्यू - Shivpuri News

शिवपुरी। समाज पर कोरोना के आक्रमण के कारण क्या—क्या बदल जाऐगा इसकी सपने में भी किसी ने कल्पना नही की होगी। लोगो को अपनो का दाह संस्कार के क्रिया कर्म और विधि विधान तक लॉक हो जाऐगा। मातम मानाने पर भी कोरोना कर्फ्यू लग जाऐगा,अपनो की मौत पर दर्द की भी हत्या करनी होगी।

कोरोना की दूसरी लहर में जिन्होने अपनो को खोया हैं वह दर्द को सबसे अधिक समझते होंगें। परिवार का सदस्य कब मर गया उसकी सूचना भी घंटो बाद मिली,ना तुलसी,ना गंगाजल,ना विधिधान से दाहसंस्कार,ना ही अस्थि संचय,ना ही अस्थि विजर्सन सब पर कोरोना ने ग्रहण लगा दिया। लोगो की संवेदनाए गम में सूख गई।

वही कुछ ऐसे भी मामले प्रकाश में आए कि कोरोना का भय इतना कि अपने के मरने की खबर पर उसके अंतिम संस्कार करने के लिए भी नही आ रहे थे,प्रशासन को पुलिस बुलाकर परिजनो बुलाना पडा। आईए जानने की कोशिश करते हैं कि कितना दर्द रहा इस कोरोना काल में।

मौतो के आंकडे छुपाए फिर भी इतनी मौतो की खबर

अकेले शिवपुरी शहर के ही एक मुक्तिधाम को ले लें तो यहां 1 अप्रैल से 27 मई तक के 58 दिनों में जलने वाली चिताओं का औसत 11 चिताएं प्रतिदिन आ रहा है। यहां मुक्तिधाम में इस दौरान 647 शवों की अंत्येष्टि की गई। एक समय ऐसा आया जब कोरोना और सामान्य मौतों के बाद आए शवों की संख्या 20 से 22 तक रही।

कोरोना से होने वाली मौतों का सिलसिला यहां 12 अप्रैल से शुरू हुआ और मई में स्थिति यह बनी कि यह संख्या कई दिनों तक तो दहाई के आंकड़े में रही। इन 647 मौतों में से 236 मौतें कोरोना महामारी से हुईं और उनकी अंत्येष्टि भी प्रथक से शमशान के एक अलग हिस्से में की गई।

गांव—गांव और तहसीलों पर हुई कोरोना जनित मौतों को इसमें शुमार नहीं किया गया बल्कि यह चितायें शिवपुरी के एक मुक्तिधाम में जली हैं। एक और आंकड़ा जो शिवपुरी जिले की तबाही की तस्वीर पेश करता है उसे देखें तो शिवपुरी और उसके बाहर अन्य जिलों में इस महामारी से जिले के जिन लोगों ने दम तोड़ा उनकी संख्या 318 है।

ना क्रियाकर्म ना पिंड दान तालों में कैद अस्थियां

इस कोरोना काल में अपनो को कंधा देने तक का सौभाग्य प्राप्त नही हुआ ना ठीक से उनका अस्थी संचयन किया जा सका, हालत यह है कि अस्थि संचयन यदि हो भी गया तो इन अस्थियों को विसर्जन की कोई राह पीडि़त परिवारों को नहीं सूझ रही। लोगों की मौत के बाद उनकी अस्थियां यहां के मरघट के अस्थि बैंक के लॉकरो में तालों में कैद विसर्जन की बाट जोह रही हैं। मृतकों की तेरहवीं पर भी रोक है ऐसे में ना उठावनी ना तेरहवीं बिना पिंडदान ना कोई क्रिया कर्म कुछ भी नसीब नहीं हो पा रहा।

राम धुन तक बंद हो गई

लाशों को जिन वाहनों से ले जाया गया उन वाहनों में बजने वाली राम धुन हे राम… तक बंद करवा दी गई, ताकि इसकी आवाज सुनकर आमजन का मनोबल ना टूटे। कितनी विचित्र बात है कि जिस राम के नाम से मनोबल ऊंचा होता था आज इस दौर में वह नाम मनोबल टूटने का सबब न बने इसलिए भय के चलते इसे बंद करा देना पड़ा।

वही डर इतना कि परिजनो को बुलाने पुलिस भेजनी पडी

श्योपुर जिले की एक महिला को उसका पति जिला अस्पताल शिवपुरी में भर्ती कराकर लावारिश छोड़कर घर लौट गया। मौत होने पर पति के इंतजार में महिला का शव आठ दिन तक फ्रिजर में रखा रहा। प्रशासन ने पत्राचार करके पति को बुलवाया और उसके सामने अंत्येष्टि कराई।

इसी तरह पिता की मौत के बाद बेटा बुलवाने पर बमुश्किल मुक्तिधाम पहुंचा। दूर से पिता का चेहरा देखा और कर्मचारी से कहकर मुखाग्नि दिलवा दी। गुना जिले की बुजुर्ग मां की मौत के बाद बेटा आने तैयार नहीं हुआ। पुलिस की मदद से बातचीत हुई ताे कहने लगा कि आप तो जला आओ, हम मृत्यु प्रमाण प़त्र ले आएंगे। समझाने पर रिश्तेदारों के संग शिवपुरी आया और अंत्येष्टि कराई।

अब शमशान में शांति..........इसे बनाए रखना प्रभु

पिछले 21 मई से शमशान को भी आराम मिला है। सामान्य मौतो की बात करे तो शहर के शमशाम पर 27 मौत होकर दाह संस्कार किया गया हैं,वही कोरोना गाईडलाईन के मुताबिक 10 लोगो को अंतिम संस्कार किया गया है।