काली रात में होता हैं प्रसिद्ध् व्हाईट गोल्ड पत्थर का अवैध परिवहन, जिम्मेदारो पर पहुंचता हैं हर वाहन का हिसाब - kolaras News

मोहम्मद फरहान काजी,रन्नोद। प्रदेश के मुखिया मप्र में माफियाओ पर नकेल कसने की बात कहते हैं लेकिन शिवपुरी जिले में सीएम का यह आदेश लागू नही हैं। प्रशासन की नाक के नीचे जमकर अवैध उत्खन्न किया जा रहा हैं और कागजो में बंद खदान जमकर दौड रही हैं। हम बात कर रहे जिले की खदानो से निकलने वाले सफेद पत्थर जिसे व्हाईट गोल्ड के नाम से जाना जाता है।

मध्यप्रदेश का शिवपुरी जिला रेत और पत्थर के अवैध उत्खनन को लेकर सुर्खियों में बना रहता है, जिले की रेत खदानों से तो दिन रात रेत का अवैध उत्खनन किया जाता रहा है। चाहे वह आरक्षित वन क्षेत्र ही क्यों न हो वहां पनडुब्बी लगाकर रेत का अवैध उत्खनन किया जाता रहा है। वहीं अब वन क्षेत्र में पत्थर की खदानों से भी पत्थर का अवैध उत्खनन हो रहा है।

रन्नौद तहसील के अंतर्गत बेदमऊ में पत्थर खदान से दिन रात पत्थर का अवैध उत्खनन हो रहा है। यह पत्थर खदान कागजों में तो बंद है। बावजूद इसके यहां से दिन रात अवैध रूप से सफेद पत्थर निकाला जा रहा है।

यह सर्वे क्र 494 नम्बर खदान जो कि संजय शर्मा के नाम से थी परन्तु समय सीमा खत्म होने के पश्चात खदान को सरेंडर कर दिया था। लेकिन अभी भी यह खदान चालू हैं और इसमें लगातार उत्खन्न किया जा रहा हैं। रात के समय यहां से ट्रक व अन्य गाड़ियों में पत्थर भरकर फैक्ट्रियों पर खनन माफिया पहुंचा रहे हैं। बेदमऊ खदान का पत्थर सफेद पत्थर जिले का फेमस पत्थर हैं।

यहां स्टोन पॉलिसिंग फैक्ट्रियों पर बेदमऊ के पत्थर की घिसाई और उसकी कटिंग कर उसे बाहर भेजा जाता था। इस पत्थर खदान से फासिल्स भी मिलते थे, जिन्हें लोग अपने घरों में सजाने के लिए भी ले जाते थे। इस पत्थर को लोग अपने घरों के बाहर भी निर्माण में लगाते हैं।

हर गाडी और ट्रेक्टर का होता हैं हिसाब

रन्नौद तहसील से चंद किलोमीटर की दूरी पर स्थित है बेदमऊ कि प्रसद्धि खदान। दिन भर यह पत्थर काटा जाता हैं और रात के अंधेरे में होता है इस माल को निकाला जाता हैं। अगर माईनिंग से इस विषय पर बात करे तो स्टाफ का रोना रोया जाता हैं।

वही खदान माफिया राजस्व की सीमा के अतिरिक्त फोरेस्ट क्षेत्र में भी उत्खन्न कर रहे हैं। वन विभाग भी आराम से रेस्ट कर रहा हैं,वही पुलिस विभाग की बात करे तो चैकी और थानो के सामने से सीना चैडा कर पत्थर से भरे वाहान निकलते हैं,जबकि हर ट्रेक्टर और गाडी का हिसाब जिम्मेदार विभागे के अधिकारियो और कर्मचरियो के पास हैं।

राजनीति से जुड़े लोग कर रहे कारोबार

लोगों का कहना है कि रेत और पत्थर के अवैध उत्खनन में राजनीति से जुड़े लोग कारोबार कर रहे हैं। बात यदि रेत की करें तो करैरा व कोलारस विधान सभा इलाके में जमकर रेत का खनन हो रहा है। रेत माफिया सरेआम वन अमले को धमकी देकर अपने ट्रैक्टर ट्रॉली ले जाता है। यह मामले कई बार सामने आए हैं। वहीं पत्थर माफिया भी रात के अंधेरे में ट्रक और ट्रैक्टर ट्रॉलियों से पत्थर का परिवहन कर रहा है।

बैलगाड़ी से भी होता रहा है, बेदमऊ 494 से अवैध पत्थर का परिवहन

बेदमऊ 494 में अवैध उत्खनन का सिलसिला नया नहीं है। यहां पहले टड़बो, बैलगाड़ी से पत्थर ढोकर उन्हें फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता रहा है। वन अमले ने कई बार कार्रवाई करने का प्रयास किया परन्तु वह प्रयास विफल रहा। पत्थर माफिया हर दिन लाखों रुपये का पत्थर निकालकर अपनी जेब भर रहा है। शासन को लाखों रुपये के राजस्व की चपत लगा रहा है।