ललित मुदगल @एक्सरे/शिवपुरी। पोहरी को नगर पंचायत का दर्जा भाजपा के पिछले शासनकाल में जून 2018 मे मिल गया था,इसके बाद सरकार कांग्रेस की आई,कांग्रेस ने पोहरी से नगर पंचायत का दर्जा वापस ले लिया था। अब पुन:मप्र की कुर्सी पर भाजपा की सरकारी आसाीन हो गई इस कारण पोहरी को नगर पंचायत का दर्जा मिल गया और नगर पंचायत की कुर्सी का आरक्षण भी फायनल हो गया।
लेकिन पोहरी को नगर पंचायत बनाने के लिए जो गांव या क्षेत्र मिलाए गए हैं उससे प्रतीत होता हैं कि पोहरी के विकास से मतलब नही था केवल जातिवाद की फिल्डिंग लगाई गई थी। यह परिशिमन स्वंय बोल रहा है। आईए पोहरी के परिशिमन का एक्सरे करते हैं कैसे इसके परशिमन में जातिवाद का जहर घुला हुआ हैं।
पोहरी तहसील को नगर पंचायत बनाने के लिए पोहरी और उसके आसपास की 7 ग्राम पंचायतो को मिलाया गया है। बताया जा रहा है कि इन सातो ग्राम पंचायतो को मिलाने से पोहरी नगर पंचायत की एक छोर से दूसरे छोर की दूरी लगभग 15 किमी होती है। पोहरी को नगर पंचायत में ग्राम पंचायत पोहरी, ग्राम पंचायत कृष्ण गंज, ग्राम पंचायत ग्वालीपुरा, ग्राम पंचायत जाखनौद, ग्राम पंचायत बैठा, ग्राम पंचायत चकराना और ग्राम पंचायत ननौरा को मिलाया गया है।
इसमें से पोहरी कृष्णगंज और ग्वालीपुरा ऐसी पंचायते है जो पोहरी की सीमा में घुस रही है। अभी वर्तमान की बात करे तो यह तीनो पंचायते कहने को अलग है लेकिन सीमाए मिलने से पूरा क्षेत्र पोहरी ही कहलाता है। इसके आलावा पोहरी केा नगर पंचायत बनाने के लिए चकराना और ननौरा ग्राम पंचायत को मिलाया गया है। ननौरा और चकराना एक दूसरे के अपोजिट दिशा में है।
ननौरा गांव पोहरी से लगभग 7 किमी की दूरी पर है और ननौरा लगभग 8 किमी की दूरी पर है। इन दोनो पंचायतो को पोहरी नगर पंचायत में मिलाना अव्यवारिक है। इस तरह से पोहरी नगर पंचायत का एक छोर से दूसरे छोर को मिलाने के लिए आपको लगभग 15 किमी की दूरी तय करनी पडेंगी।
इतनी दूरी तो शिवपुरी नगर पालिका की भी नही है। बताया जा रहा है कि पोहरी के पूर्व विधायक प्रहलाद भारती ने अपनी राजनीति की दम पर पोहरी को यह सौगात दी है। लेकिन गलत परिशिमन के कारण अब पोहरी नगर पंचायत से ही राजनीति हो गई। पोहरी से मात्र 3 किमी की दूरी पर स्थित उपसील ग्राम पंचायत को पोहरी नगर पंचायत में नही मिलाया गया है इस पर कई सवाल खडे हो रहे है। ऐसे ही पिपरघार ग्राम पंचायत भी पोहरी से 5 किमी की दूरी पर है।
जब 8 किमी की दूरी पर स्थित ननौरा ग्राम पंचायत को पोहरी नगर पंचायत में मिलाया जा सकता है तो पिपरघार और उपसील को क्यो नही.....उपसील ग्राम पंचायत का मचाखुर्द गांव पोहरी शिवपुरी रोड पर ही स्थित है और यहा पोहरी का मिडिल स्कुल है। ऐसे ही इसी पंचायत का भोजपुर गांव पोहरी पेट्रोल पंप की सीमा को छुता है।
पोहरी नगर पंचायत के परिशिमन में क्षेत्र का नही जाति का ध्यान रखा गया है। बताया जा रहा है उन पंचायतो को जबरिया ठुसा गया है जिनमें धाकड समाज के मतदादा अधिक है। आरोप लगाया जा रहा है कि इसी कारण इसमें दूर-दूर की पंचायते जबरिया ठूसी गई हैं,इस परिशिमन पर अपत्ति भी लगी थी।
पोहरी विधानसभा में जातिवाद के श्राप से श्रापित हैं। अब पोहरी का आरक्षण भी पिछडा वर्ग पुरूष हैं,धाकड नेता कोशिश कर रहे हैं कि किसी धाकड को ही दोनो पार्टी अपना प्रत्याशी बनाए क्यो कि इस नगर पंचायत की बात करे तो मतदाता धाकड जाति से ही आधिक हैं। वही पोहरी में वनाए गए वार्डो में किसी वार्ड में 1400 की मतदाता की वोटर लिस्ट हैं तो किसी में 500 की।
कुल मिलाकर सीधे—सीधे लिखा जा सकता हैं। पोहरी के परिशिमन में पोहरी के विकास का ध्यान नही रखा हैं। पोहरी नगर पंचायत की सीमा में ग्राम पंचायत भी हैं इनका त्याग कर इनके आगे की पंचायतो को अपनाया गया हैं। जो कतई सही नही है। इस मामले में अपत्तिया भी लगी थी लेकिन उनका कुछ भी नही हुआ हैं।

