बच्चे को अपनी उम्र से कही आगे की सोच को विकसित करना ही मेरा लक्ष्य है : शिक्षाविद नीतू गुप्ता

शिवपुरी। बच्चे को अपनी उम्र से कही आगे की सोच को विकसित करना ही शिक्षा की परिभाषा हो सकती हैं,छोटे बच्चो को आनंद के साथ सीखने की लिए बच्चो को सक्षम बनाना चाहिए। यही हमारी शिक्षा प्रणाली का मूल मंत्र है यह कहना है वैभव पब्लिक स्कूल की डारेक्टर श्रीमति नीतू गुप्ता का अपने जीवन में पढने और पढाने को सब कुछ मानने वाली इन शिक्षाविद ने बताया कि आज की शिक्षा के अतिरिक्त बच्चो में नैतिक शिक्षा होनी कितनी आवश्यक हैं।

शिवपुरी समाचार डॉट की संवाददाता कंचन सोनी ने वैभव पब्लिक स्कूल की डारेक्टर श्रीमति नीतू गुप्ता से कुछ विषय पर बातचीत की। इसे पढने से पूर्व श्रीमति नीतू गुप्ता का  एक संक्षिप्त परिचय  -  डारेक्टर वैभव पब्लिक स्कूल,शिक्षा एमएससी (कम्प्यूटर सांईस), एमसीए, बीएड. पति शिक्षाविद श्री नितेन्द्र कुमार गुप्त़ा संचालक वैभव कंप्यूटर एंड मैनेजमेंट ऐजूकेशन।

इस बातचीत में स्कूल की डायरेक्टर से पूछा गया कि जीवन में शिक्षा का क्षेत्र ही क्यो चुना,इसके जबाब मे उन्होंने कहा  कि शुरू से ही पढना पंसद था और उससे भी अधिक पढाना। मैं अपने कैरियर में शिक्षा की और ही जाना चाहती थी,इस कारण शिक्षा का क्षेत्र चुना। अपनी शादी से पूर्व मैं ग्वालियर में बच्चो को जीआईसिटी कॉलेज ग्वालियर में पढाती थी।

शिक्षा में कैरियर का चुनाव करने के पीछे एक ओर कारण यह था कि मेरे द्धवारा दी गई सीख मेरे स्टूडेंट के जीवन भर काम आती रहे चाहे वह नौकरी करे या व्यवसाय और कुछ ओर।

 शादी के बाद शिवपुरी आने पर सबसे पहले अंबिका कॉलेज शिवपुरी में कंप्यूटर शिक्षक  के रूप में  अध्यापन कार्य किया  उसके बाद सांईस कॉलेज में गेस्ट फैक्लटी कंप्यूटर साइंस के रूप में, फिर स्वयं के कॉलेज वैभव कंप्यूटर एंड मैनेजमेंट एजुकेशन में और अब स्वयं के  वैभव पब्लिक स्कूल में। इस प्रकार कुल मिलाकर नीतू गुप्ता जी को लगभग  18-19 वर्षों का अध्यापन कार्य का अनुभव है

वैभव पब्लिक स्कूल को शुरू करने से पूर्व शिक्षा की प्रणाली पर श्रीमति नीतू गुप्ता ने कहा कि हम छोटे बच्चो को ऐसी शिक्षा देना चाहते थे कि उन्हे आंनद आए,बस्ता देखकर घवराहट न आए जो हमारी शिक्षा पद्धति का मूल मंत्र, आनन्द के साथ सीखने के लिए बच्चो को सक्षम किया जाता है।

हमारी शिक्षा पद्धति नन्है मुन्है बच्चो को सीखने और पढ़ाई से प्यार की ओर ले जाती है। हमारे स्कूल में आकर आपके लाडले का बचपन जाग उठता है,वह सीखने के लिए तत्तपर रहता है। हम एक ऐसा स्कूल बनाना चाहते है जहां  पर बच्चा आने और सीखने को आतुर हो और यही टारगेट लेकर वैभव पब्लिक स्कूल शुरू किया था।

अपने टारगेट का अचीव करने की परेशानी पर कहा कि ऐसी शिक्षा प्रणली के लिए आवश्यक था स्कूल में अन्य स्टाफ की,जो स्कूल की जॉब को जॉव न समझकर पढाने को अपना धर्म समझे,बच्चो को डबलमैंट कर सके,उनकी सोच को पकडकर उसे सीखाने का प्रयास करे। यही एक परेशानी थी,लेकिन जहां समस्या थी वहां समाधान भी होता हैं आज हमारे स्कूल के पास ऐसी ही एक बेहतरीन टीम हैं जो बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए तत्पर है

अपनी सतुष्टि को लेकर श्रीमति नीतू गुप्ता ने कहा कि वैभव पब्लिक स्कूल इस शिक्षा सत्र में तीसरी साल रन कर रहा हैं। 150 स्टूडेंटो के प्लस संख्या हैं,क्वाटिटी से अधिक क्वालिटी की चाहत हैं,बस हम जो सीखा रहे है उससे बच्चों का चहुंमुखी विकास हो  और  बच्चे भविष्य में  सामाजिक  पारिवारिक आर्थिक  सभी स्थितियों में  सक्षम   हो  और बेहतर कर सकें

सफलता का मूल मंत्र हार्डवर्क बताते हुए कहा कि प्लान को तैयार कर उस पर फॉलो करना ,अपने प्लान पर मेहनत करना ही सफलता का मूल मंत्र हैं। भाग्य और कर्म के विश्वास के प्रश्न पर कर्म पर विश्वास बताया।

समाज कैसा होना चाहिए,समाज का हर व्यक्ति उच्च विचारो वाला होना चाहिए,उसके विचार किसी दूसरो के भले को समर्पित होना चाहिए। नैतिक शिक्षा कितनी आवश्यक है आज की शिक्षा के साथ। इस पर कहा गया कि नैतिक शिक्षा जीवन का मूल आधार होता हैं महान व्यक्ति को उच्च शिक्षा नही नैतिक शिक्षा बनाती है क्यो कि नैतिक शिक्षा में ही संस्कार,भारतीय कल्चर और इस महान संस्कृति की सेाच छुपी रहती हैं।