चीतो की नस्ल में मेक इन इंडिया की धूम, 25 माह की गामिनी ने रच दिया इतिहास, पढ़िए क्यों

Adhiraj Awasthi
Uploaded Image भोपाल। शिवपुरी-श्योपुर जिले की सीमा पर स्थित कूनो नेशनल पार्क में बीते रोज एक इतिहास बन गया है। पार्क की 25 माह की युवा मादा चीता ने 4 शावकों को जन्म दिया है। मादा चीता KGP-2 (गामिनी) को मात्र 25 माह की उम्र में शावकों को जन्म देना एक विश्व रिकॉर्ड है,अभी तक प्राय देखा गया है कि कम से कम 36 माह की मादा चीता शावकों को जन्म देती है। विदेशी चीतों को भारत की धरा पर बसाने के यह प्रोजेक्ट सफलता की और है,गामिनी ने इन शावकों को जन्म खुले जंगल मे दिया है। खुले जंगल में यह कूनो नेशनल पार्क में प्रथम प्रसव है।  

कुदरत का करिश्मा: सबसे कम उम्र में बनी माँ
सामान्यतः मादा चीता 3 वर्ष (36 माह) की आयु के बाद ही गर्भधारण करती है, लेकिन गामिनी ने मात्र 25 माह की उम्र में प्राकृतिक रूप से शावकों को जन्म दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी कम उम्र में सफल प्रसव का प्रमाण न तो किताबों में मिलता है और न ही पहले कभी देखा गया है।

मेड इन इंडिया चीतों का बढ़ता कुनबा
इस सफल प्रजनन के साथ ही कूनो में चीतों की कुल संख्या अब 54 हो गई है। खास बात यह है कि विदेशी चीतों की तुलना में अब भारतीय मूल (यहीं जन्मे) के चीतों का दबदबा बढ़ रहा है। गामिनी ने खुले जंगल में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के इन शावकों को जन्म दिया है, जो यह साबित करता है कि कूनो का इकोसिस्टम अब चीतों का स्थायी घर बन चुका है।

विदेशी घटे, भारतीय बढ़ेः कूनो में स्वदेशी चीतों का बढ़ता कुनबा
ने बताया कि इतनी कम उम्र में गर्भधारण और प्रसव के प्रमाण न किताबों में हैं और न ही व्यवहारिक रूप में दर्ज हैं। खास बात यह भी है कि शाक्कों का जन्म खुले जंगल में हुआ है। अब मादा चीता बिना मानवीय हस्तक्षेप के प्राकृतिक वातावरण में अपने शाक्कों की परवरिश करेगी।

कूनो में विदेशी चीतों की संख्या अब घटकर 20 रह गई है, जबकि भारतीय मूल के चीतों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है। KGP-2 की मैटिंग भी खुले जंगल में हुई थी, इसलिए यह नई पीढ़ी पूरी तरह भारतीय मानी जा रही है। इससे प्रोजेक्ट का फोकस अब स्वदेशी आबादी बढ़ाने की दिशा में मजबूत होता दिख रहा है।

कूनो में 11वां प्रजनन, 49 में से 37 जीवित
कूनों में अब तक 7 मादा चीताएं शावकों को जन्म दे चुकी हैं। यह 11वां सफल प्रजनन है। कुल 49 शावकों का जन्म हुआ, जिनमें से 37 जीवित हैं, जबकि 12 की मौत हो चुकी है। KPG-2 के इन 4 शावकों के साथ ही इस साल अब तक 18 शावकों का जन्म दर्ज किया गया है, जो प्रोजेक्ट की बढ़ती रफ्तार को दिखाता है।

चुनौती अभी बाकी है
मुख्य वन संरक्षक उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार, शावकों का जन्म एक बड़ी जीत है, लेकिन अब सबसे बड़ी परीक्षा खुले जंगल में इन नन्हे मेहमानों को शिकारियों और कठिन मौसम से बचाए रखने की है। कूनो में अब तक 11 बार सफल प्रजनन हो चुका है, जिससे प्रोजेक्ट की रफ्तार और भविष्य दोनों उज्ज्वल नजर आ रहे हैं।