प्रवेश उत्सव के बीच शिक्षा पर ताला, दोपहर 2 बजे बंद मिला हाई स्कूल सिनावल कलां

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। एक और मध्य प्रदेश सरकार प्रवेश उत्सव के जरिए बच्चों को स्कूलों तक लाने, ड्रॉपआउट रोकने और शिक्षा के स्तर को सुधारने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। ताजा मामला शिवपुरी जिले के खनियाधाना विकासखंड अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल सिनावल कलां से सामने आया है, जहां दोपहर 2 बजे ही स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला।

यह नजारा केवल एक स्कूल के समय से पहले बंद होने की घटना नहीं है, बल्कि यह पूरी शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जिस समय बच्चों को कक्षा में बैठकर पढ़ाई करनी चाहिए थी, उस समय स्कूल बंद मिला। नियमित समय सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक होने के बावजूद स्कूल में इस तरह की तालाबंदी ने शिक्षकों की कार्यशैली और विभागीय निगरानी दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रवेश उत्सव के बीच स्कूल बंद, शिक्षा विभाग के दावों पर लगा सवाल
राज्य सरकार इन दिनों प्रदेशभर में 1 अप्रैल से 'प्रवेश उत्सव' मना रही है। इस अभियान का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक बच्चों का स्कूलों में प्रवेश हो, पढ़ाई से दूरी खत्म हो और सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बने। इसके लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, अधिकारी बैठकों में योजनाएं बना रहे हैं, और शिक्षकों को गांव-गांव जाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

लेकिन सिनावल कलां हाई स्कूल की तस्वीर इन सारे दावों को खोखला साबित करती नजर आई। जब स्कूल के समय में ही वहां ताला लटका मिला, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब स्कूल ही नहीं खुलेगा तो बच्चे पढ़ेंगे कैसे ? और फिर प्रवेश उत्सव का वास्तविक उद्देश्य आखिर पूरा कैसे होगा?

ग्रामीणों का आरोप: यहां तो रोज की यही कहानी है
घटना के बाद जब स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ, बल्कि स्कूल में समय से पहले ताला लगना यहां आम बात बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में शिक्षकों की पूरी तरह मनमर्जी चलती है। जब मन हुआ स्कूल खोला, जब मन हुआ ताला डालकर चले गए"—यह बात ग्रामीणों की नाराजगी में साफ झलक रही थी।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षकों की लापरवाही का खामियाजा सीधे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। स्कूल का माहौल अनुशासित और नियमित होने के बजाय अव्यवस्थित और लचर होता जा रहा है। ऐसे में गांव के अभिभावकों का सरकारी स्कूलों पर भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है।

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, सरकारी स्कूलों की साख पर चोट
सरकारी स्कूलों को लेकर पहले ही ग्रामीण क्षेत्रों में कई तरह की चुनौतियां मौजूद हैं—जैसे बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई, संसाधनों की कमी और अभिभावकों का भरोसा। ऐसे में यदि शिक्षक ही समय से पहले स्कूल बंद कर दें, तो यह सीधे-सीधे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ माना जाएगा।

यह घटना सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि उस बच्चे के सपनों पर ताला है जो सरकारी स्कूल में पढ़कर आगे बढ़ना चाहता है।
जो बच्चा स्कूल पहुंचता है, किताब लेकर बैठना चाहता है, शिक्षक से सीखना चाहता है-उसे यदि बंद गेट मिले, तो यह उसके भीतर शिक्षा के प्रति निराशा और उदासीनता पैदा करता है।

बीईओ ने मानी गंभीरता, जांच और कार्रवाई का आश्वासन
इस पूरे मामले को लेकर जब विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) खनियांधाना, सुरेश कुमार काले से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले को गंभीर बताया और कहा कि मुझे सिनावल कलां हाई स्कूल के संबंध में पहले भी कुछ शिकायतें मिली हैं। आज आपके माध्यम से जानकारी मिली है कि दोपहर 2 बजे ही स्कूल बंद पाया गया है। यह गंभीर लापरवाही है। मैं तत्काल मामले की जांच कराऊंगा और दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।