1 अप्रैल पर डिजिटल फूल के दौर में गूगल बना उम्मीद, 6 साल बाद परिवार से मिला बेटा

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। आज 1 अप्रैल है एक अप्रैल को लोग एक दूसरे का मुर्ख बनाते थे,लेकिन अब सयम बदला हैं,अब सोशल का युग है और लोग सोशल पर फ्रॉड होने की खबर प्रतिदिन मिलती है,इसे हमे डिजिटल फूल कह सकते है,लेकिन एआई जैसी सपनो की दुनिया और फेक न्यूज, फ्रॉड, धोखे से भरे सोशल के सकारात्मक पहलू भी मिल रहे है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हमे बीते रोज देखने को मिला है,लेकिन इस मामले की जानकारी आज आई है।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले का एक युवक, जो कोरोना काल में 6 साल पहले अपने परिवार से बिछड़ गया था, वह आखिरकार गूगल मैप, वीडियो कॉल और एक ढाबा संचालक की संवेदनशील पहल की बदौलत अपने घरवालों से मिल सका।

2020 के लॉकडाउन में लापता हुआ था अखिलेश
जानकारी के अनुसार, अखिलेश कुमार पटेल, पिता रामआसरे पटेल, निवासी बरौउआ, जिला प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश), वर्ष 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान अचानक अपने गांव से लापता हो गया था। उस दौर में पूरा देश बंद था, आवाजाही ठप थी और लोग अपने-अपने घरों में कैद थे। ऐसे समय में अखिलेश के गायब होने से परिवार परेशान हो गया था। परिजनों ने उसे रिश्तेदारों, परिचितों, पड़ोसी जिलों और संभावित ठिकानों पर बहुत तलाशा, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिला। परिवार ने गुमशुदगी भी दर्ज कराई, लेकिन समय बीतता गया और अखिलेश की कोई खबर नहीं आई। धीरे-धीरे इंतजार बेबस उम्मीद में बदल गया और फिर वह उम्मीद भी लगभग टूटने लगी।

भटकते-भटकते शिवपुरी पहुंचा, पहचान बताने की हालत में भी नहीं था
बताया जा रहा है कि गांव से लापता होने के बाद अखिलेश भटकते-भटकते किसी बस में बैठ गया और कई पड़ाव पार करते हुए वह शिवपुरी जिले के अमोला थाना क्षेत्र स्थित सिरसौद तिराहे तक पहुंच गया। यहां पहुंचने के बाद उसने पेट भरने और जीवित रहने के लिए एक होटल/ढाबे पर काम करना शुरू कर दिया। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि अखिलेश मानसिक रूप से अस्वस्थ था। वह अपनी पहचान, पता और परिवार के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था।

ढाबा संचालक विनोद शिवहरे ने दिखाई संवेदनशीलता, यहीं से बदली किस्मत
करीब दो महीने पहले अखिलेश शिवहरे ढाबा पर काम करने लगा था। ढाबा संचालक विनोद शिवहरे ने युवक के व्यवहार और उसकी स्थिति को देखकर महसूस किया कि वह सामान्य परिस्थितियों में यहां तक नहीं पहुंचा होगा। 28 मार्च को विनोद शिवहरे ने उससे विस्तार से जानकारी लेने की कोशिश की। भले ही अखिलेश अपनी बात साफ-साफ नहीं बता पा रहा था, लेकिन उसने कुछ टूटे-फूटे शब्द, गांव जैसे नाम और दिशा संबंधी संकेत जरूर दिए।

विनोद ने हार नहीं मानी। उन्होंने गूगल मैप का सहारा लिया और युवक की बातों के आधार पर संभावित स्थान खोजने शुरू किए। यह प्रयास किसी औपचारिक जांच का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह एक संवेदनशील इंसान की जिद थी कि अगर यह युवक किसी का बेटा है, किसी का भाई है, तो उसे उसके घर तक पहुंचना चाहिए।

गूगल मैप से मिला नंबर, फिर वीडियो कॉल पर मां ने देखा बेटा और फूट पड़ी
कई प्रयासों के बाद गूगल मैप से एक संभावित क्षेत्र और वहां का एक नंबर मिला। संयोग से वह नंबर अखिलेश के गांव के एक परिचित व्यक्ति का निकला। जब उस नंबर पर संपर्क किया गया और अखिलेश के बारे में जानकारी साझा की गई, तो उधर से भी उम्मीद की एक किरण जगी। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए परिवार को युवक दिखाया गया। जैसे ही मां ने मोबाइल स्क्रीन पर अपने बिछड़े बेटे को देखा, वह खुद को रोक नहीं सकी और फूट-फूटकर रो पड़ी।

बेटे के गम में पिता ने तोड़ दिया दम, घर लौटने से पहले ही टूट चुका था एक सहारा
इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि अखिलेश के लापता होने के बाद उसके पिता रामआसरे पटेल गहरे सदमे में आ गए थे। परिजनों ने बताया कि बेटे की तलाश, उसकी चिंता और उसके लौटने की अधूरी आस ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था। इसी मानसिक पीड़ा के बीच उनका निधन हो गया। यानी जिस बेटे के लौटने की राह एक पिता बरसों तक देखता रहा, वह बेटा तो आखिरकार मिल गया, लेकिन उसे गले लगाने के लिए पिता अब इस दुनिया में नहीं थे।

511 किलोमीटर दूर से भाई पहुंचा शिवपुरी, अमोला पुलिस ने कराया सुपुर्द
जैसे ही परिवार को पूरी तरह विश्वास हो गया कि मिला हुआ युवक वास्तव में अखिलेश ही है, उसके भाई सचिन पटेल ने बिना देर किए करीब 511 किलोमीटर का सफर तय किया और शिवपुरी पहुंच गया। मंगलवार को अमोला थाना पुलिस की मौजूदगी में अखिलेश को सकुशल उसके परिजनों को सौंप दिया गया।

शिवपुरी ने दिखाई इंसानियत, साथ मे पढे शिवपुरी समाचार का सार भी
इस पूरे घटनाक्रम में जहां अमोला पुलिस की भूमिका सराहनीय रही, वहीं सबसे अधिक चर्चा ढाबा संचालक विनोद शिवहरे की हो रही है, जिन्होंने सिर्फ काम करने वाले एक युवक की तरह नहीं, बल्कि किसी बिछड़े घर के बेटे की तरह उसे देखा।

आज जब सोशल मीडिया और इंटरनेट का बड़ा हिस्सा फेक न्यूज, फ्रॉड, धोखे और दिखावे में उलझा नजर आता है, तब शिवपुरी की यह घटना बताती है कि अगर नीयत साफ हो, तो गूगल, मैप, वीडियो कॉल और सोशल प्लेटफॉर्म किसी परिवार की दुनिया फिर से बसाने का माध्यम बन सकते हैं।