शिवपुरी। शिवपुरी शहर के कलेक्ट्रेट कार्यालय पर आज एक सहायक शिक्षक ने शिकायत की हैं कि मेरी वार्षिक वेतन वृद्धि जुलाई 2023 से बिना किसी ठोस आधार के रोक दी गई है,में बहुत परेशान हूं और मेरा घर का खर्चा बड़ी मुश्किल से चल रहा हैं।
स्थानांतरण के बाद की गई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार पिछोर विकासखंड में पदस्थ नरेश कुमार भार्गव ने बताया कि उनका स्थानांतरण लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आदेश पर 22 अक्टूबर 2022 को शा.प्रा.वि. छिरवाहा से नवीन पदस्थापना शा.प्रा.वि. पहाड़पुर बडैरा में हो चुका था। उन्होंने 28 अक्टूबर 2022 को पुरानी शाला से कार्यमुक्ति ले ली थी और 01 नवंबर 2022 को नई शाला में उपस्थिति दर्ज करा दी थी। इसके बावजूद, पुरानी शाला छिरवाहा से संबंधित किसी शिकायत के आधार पर जुलाई 2023 में उनकी वेतन वृद्धि रोकने का आदेश जारी कर दिया गया।
दस्तावेजों में खुद को बताया निर्दोष
शिकायत शाला प्रभारी के विरुद्ध थी, जबकि शिक्षक ने 04 दिसंबर 2019 को ही शाला का प्रभार सौंप दिया था, जिसकी चार्जशीट उनके पास है,वहीं ग्राम छिरवाहा के निवासियों और शिकायतकर्ता ने स्वयं पंचनामा तैयार कर शिक्षक को निर्दोष बताया है,जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब भी संकुल कार्यालय पिछोर में समय सीमा के भीतर जमा किया गया था।
प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ी नाराजगी
शिक्षक का कहना है कि वे पिछले ढाई वर्षों में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, समस्या निवारण शिविर और कलेक्टर कार्यालय में आधा दर्जन से अधिक बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन आज दिनांक तक उनकी रोकी गई वेतन वृद्धि संचालित नहीं की गई है। बार-बार आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से शिक्षक को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
न्यायालय की शरण लेने की चेतावनी
आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि यदि इस बार भी प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया, तो शिक्षक को विवश होकर न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी। वर्तमान में यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानांतरण के बाद की गई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार पिछोर विकासखंड में पदस्थ नरेश कुमार भार्गव ने बताया कि उनका स्थानांतरण लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आदेश पर 22 अक्टूबर 2022 को शा.प्रा.वि. छिरवाहा से नवीन पदस्थापना शा.प्रा.वि. पहाड़पुर बडैरा में हो चुका था। उन्होंने 28 अक्टूबर 2022 को पुरानी शाला से कार्यमुक्ति ले ली थी और 01 नवंबर 2022 को नई शाला में उपस्थिति दर्ज करा दी थी। इसके बावजूद, पुरानी शाला छिरवाहा से संबंधित किसी शिकायत के आधार पर जुलाई 2023 में उनकी वेतन वृद्धि रोकने का आदेश जारी कर दिया गया।
दस्तावेजों में खुद को बताया निर्दोष
शिकायत शाला प्रभारी के विरुद्ध थी, जबकि शिक्षक ने 04 दिसंबर 2019 को ही शाला का प्रभार सौंप दिया था, जिसकी चार्जशीट उनके पास है,वहीं ग्राम छिरवाहा के निवासियों और शिकायतकर्ता ने स्वयं पंचनामा तैयार कर शिक्षक को निर्दोष बताया है,जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब भी संकुल कार्यालय पिछोर में समय सीमा के भीतर जमा किया गया था।
प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ी नाराजगी
शिक्षक का कहना है कि वे पिछले ढाई वर्षों में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, समस्या निवारण शिविर और कलेक्टर कार्यालय में आधा दर्जन से अधिक बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन आज दिनांक तक उनकी रोकी गई वेतन वृद्धि संचालित नहीं की गई है। बार-बार आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से शिक्षक को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
न्यायालय की शरण लेने की चेतावनी
आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि यदि इस बार भी प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया, तो शिक्षक को विवश होकर न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी। वर्तमान में यह मामला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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